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Sunday, August 9, 2026

CBSE Class 10 Hindi 'A' Sample Paper 4 - 2026-27

CBSE Class 10 Hindi 'A' Sample Paper 4 (High-Level) - 2026-27
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सत्र 2026–27 — अभ्यास परीक्षा (Sample Paper – 4,
कक्षा: 10वीं
विषय: हिंदी 'अ' (Course A)
समय: 3 घंटे
पूर्णांक: 80
विद्यार्थी का नाम: ______________________ अनुक्रमांक: __________ अनुभाग: __________

सामान्य निर्देश:

1. यह प्रश्नपत्र चार खंडों – क, ख, ग और घ – में विभाजित है।

2. खंड 'क' में अपठित गद्यांश एवं काव्यांश पर आधारित प्रश्न हैं — कुल 14 अंक।

3. खंड 'ख' में व्यावहारिक व्याकरण के प्रश्न हैं — कुल 16 अंक। इसमें 20 प्रश्न दिए गए हैं, जिनमें से किन्हीं 16 प्रश्नों (प्रत्येक विषय से 5 में से 4) के उत्तर देने हैं।

4. खंड 'ग' में पाठ्यपुस्तक (क्षितिज भाग-2) एवं पूरक पाठ्यपुस्तक (कृतिका भाग-2) पर आधारित प्रश्न हैं — कुल 30 अंक।

5. खंड 'घ' में रचनात्मक लेखन के प्रश्न हैं — कुल 20 अंक।

6. यह प्रश्नपत्र उच्च-स्तरीय / HOTS अभ्यास संस्करण है — प्रश्नों में विश्लेषण, तुलना, कारण-स्पष्टीकरण और गहन चिंतन पर विशेष बल दिया गया है।

7. जहाँ आंतरिक विकल्प दिए गए हैं, वहाँ निर्देशानुसार ही उत्तर दें। शब्द-सीमा का विशेष ध्यान रखें।

8. उत्तर स्पष्ट, तर्कसंगत, शुद्ध एवं क्रमबद्ध भाषा में लिखें।

खंड – क : अपठित बोध   (कुल अंक – 14)
प्रश्न 1. निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए: 7
स्वतंत्रता और अनुशासन को प्रायः विपरीत ध्रुवों पर रखकर देखा जाता है, मानो दोनों में से किसी एक को ही चुना जा सकता हो। परंतु गहराई से विश्लेषण करने पर यह भ्रम टूट जाता है। सच्ची स्वतंत्रता कभी भी अराजकता का पर्याय नहीं होती; यह उस अनुशासन के भीतर ही पल्लवित होती है जो व्यक्ति स्वयं अपने विवेक से अपनाता है। जो व्यक्ति बाहरी नियंत्रण से मुक्त होकर भी आंतरिक मर्यादा का पालन करता है, वही वास्तविक अर्थों में स्वतंत्र कहलाने का अधिकारी है। इसके विपरीत, जो स्वतंत्रता को केवल अनियंत्रित इच्छाओं की पूर्ति समझ बैठता है, वह शीघ्र ही अपने ही निर्णयों का बंदी बन जाता है। यह विरोधाभास विशेष रूप से किशोरावस्था में स्पष्ट दिखाई देता है, जब युवा पीढ़ी स्वतंत्रता की माँग तो करती है, परंतु उसके साथ आने वाले उत्तरदायित्व को स्वीकार करने में संकोच करती है। ऐसे में शिक्षा की भूमिका केवल ज्ञान देने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि यह विद्यार्थी को यह समझाने का माध्यम बनती है कि वास्तविक स्वतंत्रता आत्म-नियंत्रण से जन्म लेती है, बाहरी बंधनों के अभाव से नहीं। जो समाज इस सूक्ष्म भेद को नहीं समझ पाता, वह स्वतंत्रता के नाम पर धीरे-धीरे अपनी सामूहिक मर्यादा खोता चला जाता है। अतः यह कहना अनुचित न होगा कि अनुशासन स्वतंत्रता का शत्रु नहीं, बल्कि उसकी सबसे विश्वसनीय संरक्षक शक्ति है, जो व्यक्ति और समाज दोनों को दीर्घकालिक स्थिरता प्रदान करती है।
(क) बहुविकल्पीय प्रश्न 3
(i) गद्यांश के अनुसार सच्ची स्वतंत्रता किसके भीतर पल्लवित होती है?
(A) बाहरी नियंत्रण के अभाव में (B) व्यक्ति के स्वयं अपनाए गए अनुशासन में (C) अनियंत्रित इच्छाओं की पूर्ति में (D) सामाजिक बंधनों की अनुपस्थिति में
(ii) जो व्यक्ति स्वतंत्रता को अनियंत्रित इच्छाओं की पूर्ति समझ बैठता है, उसके साथ अंततः क्या होता है?
(A) वह अधिक स्वतंत्र हो जाता है (B) वह अपने ही निर्णयों का बंदी बन जाता है (C) समाज उसकी प्रशंसा करता है (D) उसे कोई हानि नहीं होती
(iii) गद्यांश के अनुसार अनुशासन और स्वतंत्रता के बीच क्या संबंध बताया गया है?
(A) अनुशासन स्वतंत्रता का शत्रु है (B) दोनों का कोई संबंध नहीं (C) अनुशासन स्वतंत्रता की संरक्षक शक्ति है (D) स्वतंत्रता अनुशासन को नष्ट करती है
(ख) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30–40 शब्दों में दीजिए 4
(iv) गद्यांश में वर्णित विरोधाभास किशोरावस्था में विशेष रूप से क्यों स्पष्ट दिखाई देता है? कारण सहित स्पष्ट कीजिए। 2
(v) गद्यांश के आधार पर शिक्षा की भूमिका का विश्लेषण करते हुए बताइए कि वह किस प्रकार विद्यार्थी को वास्तविक स्वतंत्रता का अर्थ समझाती है। 2
प्रश्न 2. निम्नलिखित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए: 7

मैं वह दीपक नहीं, जो केवल औरों को राह दिखाए,
मैं वह ज्वाला हूँ, जो स्वयं जलकर भी मार्ग बनाए।

तूफानों से डरकर बुझ जाना, यह मेरी नियति नहीं,
हर आँधी में और प्रखर होना, यही है मेरी रीति।

मुझे न चाहिए किसी की छाया, न किसी सहारे का बंधन,
अपने ही तेज से रचता हूँ, अपने पथ का हर कण-कण।

जो स्वयं को जलाकर औरों को रोशन करता जाए,
वही सच्चा दीप कहलाए, वही जग में अमर हो जाए।

(क) बहुविकल्पीय प्रश्न 3
(i) कवि स्वयं को किसके समान बताता है और क्यों?
(A) दीपक, क्योंकि वह केवल प्रकाश देता है (B) ज्वाला, क्योंकि वह स्वयं जलकर भी मार्ग बनाता है (C) छाया, क्योंकि वह सुरक्षा देती है (D) तूफान, क्योंकि वह विनाशकारी है
(ii) कवि की "नियति" क्या नहीं है?
(A) आगे बढ़ना (B) तूफानों से डरकर बुझ जाना (C) संघर्ष करना (D) प्रखर होना
(iii) काव्यांश के अनुसार सच्चा दीप कौन कहलाता है?
(A) जो कभी नहीं जलता (B) जो स्वयं को जलाकर औरों को रोशन करता है (C) जो दूसरों की छाया में रहता है (D) जो तूफान से बुझ जाता है
(ख) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30–40 शब्दों में दीजिए 4
(iv) "अपने ही तेज से रचता हूँ, अपने पथ का हर कण-कण" — पंक्ति में निहित आत्मनिर्भरता के भाव का विश्लेषण कीजिए। 2
(v) काव्यांश में 'दीपक' और 'ज्वाला' के प्रतीकों के माध्यम से कवि किस भिन्नता को स्पष्ट करना चाहता है? 2
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खंड – ख : व्यावहारिक व्याकरण   (कुल अंक – 16)

निर्देश: इस खंड में कुल 20 प्रश्न दिए गए हैं। प्रत्येक विषय से 5 में से किन्हीं 4 प्रश्नों के उत्तर दीजिए (कुल 16 प्रश्न)। इस संस्करण में वाक्य-रचना व पहचान संबंधी प्रश्न अपेक्षाकृत अधिक विश्लेषणात्मक हैं।

3.1 रचना के आधार पर वाक्य भेद (5 में से 4 कीजिए) 4
(i) "यद्यपि उसने कड़ी मेहनत की, तथापि वह परीक्षा में असफल रहा, क्योंकि उसकी तैयारी अधूरी थी।" — यह वाक्य किस भेद का उदाहरण है?
(A) सरल वाक्य(B) संयुक्त वाक्य(C) मिश्र वाक्य(D) कोई नहीं
(ii) "न केवल उसने अपनी गलती स्वीकार की, बल्कि उसने सुधार भी किया।" — यह वाक्य किस भेद का है?
(A) सरल वाक्य(B) संयुक्त वाक्य(C) मिश्र वाक्य(D) कोई नहीं
(iii) "परिश्रमी होने के कारण तथा अनुशासन में रहने के फलस्वरूप वह हर क्षेत्र में सफल हुआ।" — इस सरल वाक्य को मिश्र वाक्य में बदलिए (कारणवाचक उपवाक्य का प्रयोग करते हुए)।
(iv) "जब तक सूर्य अस्त नहीं हुआ, तब तक किसान खेत में काम करते रहे, और जैसे ही अंधेरा छाया, वे घर लौट आए।" — इस मिश्र वाक्य को संयुक्त वाक्य में बदलिए।
(v) निम्नलिखित में से मिश्र वाक्य पहचानिए, जिसमें एक से अधिक आश्रित उपवाक्य हों:
(A) वह थका था, फिर भी उसने काम पूरा किया(B) जो व्यक्ति सत्य बोलता है और जो अनुशासित रहता है, वह सम्मान पाता है(C) वह गया और लौट आया(D) उसने खाना खाया, फिर सो गया
3.2 वाच्य (5 में से 4 कीजिए) 4
(i) "बच्चों द्वारा बगीचे में फूल लगाए गए और उनकी देखभाल की गई।" — इस मिश्रित वाक्य में वाच्य पहचानिए।
(A) दोनों भाग कर्मवाच्य में हैं(B) एक भाग कर्तृवाच्य, दूसरा कर्मवाच्य में है(C) दोनों भाग भाववाच्य में हैं(D) दोनों कर्तृवाच्य में हैं
(ii) "अनुभवी शिक्षक द्वारा जटिल विषय को सरलता से समझाया गया।" — इस वाक्य को कर्तृवाच्य में बदलिए।
(iii) "बुजुर्ग व्यक्ति से अब सीढ़ियाँ नहीं चढ़ी जातीं, यद्यपि वे प्रयास अवश्य करते हैं।" — रेखांकित अंश किस वाच्य को दर्शाता है, और भाववाच्य की क्या पहचान है?
(A) कर्तृवाच्य(B) कर्मवाच्य(C) भाववाच्य(D) कोई नहीं
(iv) "किसानों द्वारा वर्षों के अथक परिश्रम से बंजर भूमि को उपजाऊ बनाया गया।" — इस वाक्य को कर्तृवाच्य में बदलिए, वाक्य का अर्थ यथावत रखते हुए।
(v) "इस भीषण गर्मी में मुझसे अब चला नहीं जाता।" — इस वाक्य में वाच्य पहचानते हुए स्पष्ट कीजिए कि यह कर्मवाच्य से किस प्रकार भिन्न है।
3.3 पद परिचय (5 में से 4 कीजिए) 4

निर्देश: रेखांकित पद का पूर्ण एवं विश्लेषणात्मक पद परिचय दीजिए (जाति, लिंग, वचन, कारक/काल, तथा वाक्य में संबंध सहित)।

(i) जो विद्यार्थी निरंतर परिश्रम करते हैं, वे अवश्य सफल होते हैं। — रेखांकित पद का पद परिचय दीजिए।
(ii) अध्यापक ने छात्रों को समझाया कि परिश्रम का कोई विकल्प नहीं। — रेखांकित पद का पद परिचय दीजिए।
(iii) जिस व्यक्ति ने ईमानदारी नहीं छोड़ी, वह अंततः सफल हुआ। — रेखांकित पद का पद परिचय दीजिए।
(iv) बादल आकाश में घुमड़ रहे थे। — रेखांकित पद का पद परिचय दीजिए।
(v) अरे! तुमने यह कैसे कर दिखाया? — रेखांकित पद का पद परिचय दीजिए।
3.4 अलंकार (5 में से 4 कीजिए) 4
(i) "मैया मैं तो चंद खिलौना लैहौं। जोई-जोई अरि हठि रुचि रुचि, सोई-सोई मोहि दैहौं॥" जैसी पंक्तियों की श्रेणी में — "मुख मानो पूर्णचंद्र का, सुंदर और अनुपम है" — इसमें कौन-सा अलंकार है, और यह उपमा से किस प्रकार भिन्न है?
(A) उपमा(B) रूपक(C) उत्प्रेक्षा(D) अतिशयोक्ति
(ii) "उसकी वाणी में अमृत घुला था" — इस पंक्ति में कौन-सा अलंकार है? स्पष्ट कीजिए कि यह रूपक क्यों है, उपमा क्यों नहीं।
(A) उपमा(B) रूपक(C) उत्प्रेक्षा(D) मानवीकरण
(iii) "वीर सैनिक की गर्जना से धरती काँपी, आकाश डोला और पर्वत हिल उठे" — इस पंक्ति में प्रयुक्त अलंकार व उसकी विशेषता बताइए।
(A) उपमा(B) रूपक(C) अतिशयोक्ति(D) मानवीकरण
(iv) "निर्जन वन में पेड़ आपस में फुसफुसाते और हवा उनकी बात सुनकर मुस्कुराती है" — इस पंक्ति में कौन-सा अलंकार है, और यह अलंकार जड़ वस्तुओं में क्या गुण आरोपित करता है?
(A) मानवीकरण(B) उपमा(C) रूपक(D) उत्प्रेक्षा
(v) "उसका धैर्य पर्वत के समान अटल है, परंतु हृदय नदी के समान कोमल" — इस पंक्ति में प्रयुक्त अलंकार पहचानकर उपमेय-उपमान स्पष्ट कीजिए।
(A) उपमा(B) रूपक(C) उत्प्रेक्षा(D) अतिशयोक्ति
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खंड – ग : पाठ्यपुस्तक एवं पूरक पाठ्यपुस्तक   (कुल अंक – 30)
4.1 क्षितिज भाग-2 — गद्य खंड 11

निम्नलिखित गद्यांश 'लखनवी अंदाज़' पाठ पर आधारित है। इसे पढ़कर पूछे गए विश्लेषणात्मक प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

रेलगाड़ी के उस डिब्बे में लेखक की भेंट एक ऐसे नवाब साहब से हुई, जिनकी संपूर्ण जीवन-शैली में दिखावे और तथाकथित सभ्यता का बोलबाला था। जब भूख लगने पर लेखक ने उन्हें ककड़ी काटते और उसकी सुगंध सूँघते देखा, तो उन्हें आश्चर्य हुआ कि नवाब साहब ककड़ी को केवल देखकर संतुष्ट हो रहे थे, खाकर नहीं। नवाब साहब का तर्क था कि ककड़ी जैसी साधारण वस्तु खाना उनके संभ्रांत परिवेश के अनुकूल नहीं, यह केवल गरीबों का भोजन है। यह देखकर लेखक को यह स्पष्ट रूप से समझ आया कि किस प्रकार सामंती मानसिकता वाले लोग वास्तविक आवश्यकताओं को नजरअंदाज करके केवल आडंबरपूर्ण शिष्टाचार में उलझे रहते हैं। नवाब साहब की यह प्रवृत्ति उस पतनशील सामंती वर्ग का प्रतीक थी, जो अपनी वास्तविक सामाजिक-आर्थिक स्थिति को स्वीकार करने के बजाय झूठी शान और दिखावे में जीवन व्यतीत करता रहा।
बहुविकल्पीय प्रश्न 5
(i) नवाब साहब ककड़ी को खाने के बजाय क्या कर रहे थे?
(A) फेंक रहे थे(B) देखकर और सूँघकर संतुष्ट हो रहे थे(C) बाँट रहे थे(D) बेच रहे थे
(ii) नवाब साहब के अनुसार ककड़ी खाना किसके अनुकूल नहीं था?
(A) उनके स्वास्थ्य के(B) उनके संभ्रांत परिवेश/शिष्टाचार के(C) उनकी भूख के(D) उनके धर्म के
(iii) लेखक को नवाब साहब के व्यवहार से क्या स्पष्ट हुआ?
(A) वे बहुत उदार थे(B) सामंती मानसिकता वाले लोग आडंबर में उलझे रहते हैं(C) वे बहुत गरीब थे(D) वे बहुत विनम्र थे
(iv) नवाब साहब की प्रवृत्ति किस वर्ग का प्रतीक थी?
(A) उभरते मध्यम वर्ग का(B) पतनशील सामंती वर्ग का(C) श्रमिक वर्ग का(D) कृषक वर्ग का
(v) गद्यांश के अनुसार नवाब साहब ने अपनी वास्तविक स्थिति को कैसे संभाला?
(A) उसे स्वीकार करके(B) झूठी शान और दिखावे में जीकर उसे नकारते हुए(C) उसे सुधारकर(D) उसके बारे में किसी को न बताकर
विषयवस्तु आधारित प्रश्न (4 में से किन्हीं 3 के उत्तर लगभग 25–30 शब्दों में दीजिए) 6
(vi) नवाब साहब का चरित्र उस समय के सामंती वर्ग की मानसिकता को किस प्रकार उजागर करता है? विश्लेषण कीजिए। 2
(vii) पाठ का शीर्षक 'लखनवी अंदाज़' कहानी की मूल भावना को किस प्रकार सटीक रूप से व्यक्त करता है? 2
(viii) लेखक की दृष्टि नवाब साहब की दृष्टि से किस प्रकार भिन्न थी, और यह भिन्नता क्या दर्शाती है? 2
(ix) पाठ के माध्यम से लेखक आडंबर और दिखावे पर क्या व्यंग्यात्मक टिप्पणी करता है? 2
4.2 क्षितिज भाग-2 — काव्य खंड 11

निम्नलिखित काव्यांश 'मनुष्यता' कविता के भाव पर आधारित है। इसे पढ़कर पूछे गए विश्लेषणात्मक प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे-मिटे,
स्वयं भूखा रहकर भी जो दूसरों की भूख हरे।

अकेले चलकर मिलती नहीं मंज़िल, यह जान लो,
सभी के साथ चलने में ही, है सच्ची पहचान तो।

स्वार्थ की सीमा में बँधकर, मनुज नहीं बन पाता,
परमार्थ के पथ पर चलकर ही, सच्चा इंसान कहलाता।

बहुविकल्पीय प्रश्न 5
(i) कवि के अनुसार सच्चा मनुष्य कौन है?
(A) जो केवल स्वयं के लिए जीता है(B) जो दूसरों के लिए मरे-मिटे और उनकी भूख हरे(C) जो धनवान है(D) जो अकेला रहना पसंद करता है
(ii) कवि के अनुसार मंज़िल कैसे मिलती है?
(A) अकेले चलने से(B) सभी के साथ चलने से(C) प्रतिस्पर्धा से(D) आराम करने से
(iii) काव्यांश के अनुसार मनुष्य कब सच्चा मनुष्य नहीं बन पाता?
(A) जब वह परमार्थ करता है(B) जब वह स्वार्थ की सीमा में बँध जाता है(C) जब वह सबके साथ चलता है(D) जब वह त्याग करता है
(iv) काव्यांश में किस मार्ग को अपनाने की प्रेरणा दी गई है?
(A) स्वार्थ का मार्ग(B) परमार्थ का मार्ग(C) एकांत का मार्ग(D) प्रतिस्पर्धा का मार्ग
(v) काव्यांश का केंद्रीय भाव क्या है?
(A) व्यक्तिवाद और स्वार्थ का समर्थन(B) सामूहिकता, परोपकार और मानवता की महत्ता(C) धन-संचय की प्रेरणा(D) एकांत जीवन का महत्व
काव्यबोध आधारित प्रश्न (4 में से किन्हीं 3 के उत्तर लगभग 25–30 शब्दों में दीजिए) 6
(vi) "अकेले चलकर मिलती नहीं मंज़िल" — पंक्ति में निहित सामूहिकता के दर्शन का विश्लेषण कीजिए। 2
(vii) कवि 'मनुष्यता' और 'मनुष्य' शब्दों के बीच किस सूक्ष्म भेद को रेखांकित करना चाहता है? 2
(viii) काव्यांश के अनुसार स्वार्थ और परमार्थ में से कौन-सा मार्ग अधिक श्रेष्ठ बताया गया है, और क्यों? 2
(ix) इस कविता की प्रासंगिकता वर्तमान समाज के संदर्भ में स्पष्ट कीजिए। 2
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4.3 कृतिका भाग-2 8

निम्नलिखित तीन विश्लेषणात्मक प्रश्नों में से किन्हीं दो के उत्तर लगभग 50–60 शब्दों में दीजिए।

(i) 'हरिहर काका' पाठ के आधार पर विश्लेषण कीजिए कि धार्मिक संस्थाएँ और परिवार, दोनों किस प्रकार स्वार्थ की समान प्रवृत्ति दर्शाते हैं, यद्यपि उनके स्वरूप भिन्न हैं। 4
(ii) 'माता का अंचल' पाठ में बालक की दृष्टि से कथा कहे जाने का लेखक के उद्देश्य पर क्या प्रभाव पड़ता है, तर्कसहित स्पष्ट कीजिए। 4
(iii) 'साना साना हाथ जोड़ि' पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि यात्रा-वृत्तांत विधा किस प्रकार लेखिका को प्रकृति और मानवीय संस्कृति दोनों का समावेशी चित्रण करने में सक्षम बनाती है। 4
खंड – घ : रचनात्मक लेखन   (कुल अंक – 20)
5.1 अनुच्छेद लेखन (किसी एक विषय पर लगभग 120 शब्दों में) 6
(i) क्या तकनीक मानवीय संवेदनाओं को कम कर रही है? — संकेत बिंदु: तर्क के दोनों पक्ष, वर्तमान उदाहरण, संतुलित निष्कर्ष।
(ii) परीक्षा-परिणाम ही सफलता का एकमात्र मापदंड नहीं — संकेत बिंदु: वर्तमान दबाव, विकल्प, दीर्घकालिक दृष्टिकोण।
(iii) पर्यावरण संरक्षण: व्यक्तिगत उत्तरदायित्व अथवा सरकारी नीति? — संकेत बिंदु: दोनों पक्षों की भूमिका, संतुलन की आवश्यकता, निष्कर्ष।
5.2 पत्र लेखन (किसी एक पर लगभग 100 शब्दों में) 5
(i) समाचार-पत्र के संपादक को विद्यालयों में बढ़ते परीक्षा-तनाव की समस्या और उसके संभावित समाधान पर एक विचारपूर्ण पत्र लिखिए।
— अथवा —
अपने मित्र को, जो परीक्षा में असफल होने से निराश है, उसे प्रोत्साहित करते हुए एक संवेदनशील अनौपचारिक पत्र लिखिए।
5.3 स्ववृत्त लेखन (Bio-data) अथवा ई-मेल लेखन (लगभग 80 शब्दों में) 5
(i) एक शोध-संस्थान में 'ग्रीष्मकालीन शोध-सहायक (इंटर्न)' पद हेतु अपना स्ववृत्त (Bio-data) तैयार कीजिए, जिसमें प्रासंगिक कौशल स्पष्ट रूप से दर्शाए गए हों।
— अथवा —
विद्यालय की वाद-विवाद प्रतियोगिता में भाग लेने हेतु अपने विषय-अध्यापक को तर्कसंगत अनुरोध करते हुए एक ई-मेल लिखिए।
5.4 विज्ञापन लेखन अथवा संदेश लेखन (लगभग 40 शब्दों में) 4
(i) विद्यालय में आयोजित होने वाली अंतर-विद्यालय वाद-विवाद प्रतियोगिता के लिए एक आकर्षक एवं जानकारीपूर्ण विज्ञापन तैयार कीजिए।
— अथवा —
अपने अभिभावकों के लिए एक संदेश लिखिए, जिसमें आप उन्हें सूचित करें कि विद्यालय की परियोजना पर चर्चा हेतु आप मित्र के साथ पुस्तकालय में रुकेंगे।
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उत्तरमाला / ANSWER KEY
खंड – क : अपठित बोध
प्रश्न 1 (गद्यांश): (i) B   (ii) B   (iii) C
(iv) किशोरावस्था में युवा स्वतंत्रता की माँग तो करते हैं, परंतु उससे जुड़े उत्तरदायित्व को स्वीकार करने में हिचकते हैं, जिससे यह विरोधाभास स्पष्ट होता है।
(v) शिक्षा विद्यार्थी को यह समझाती है कि वास्तविक स्वतंत्रता आत्म-नियंत्रण से जन्म लेती है, न कि बाहरी बंधनों की अनुपस्थिति से।
प्रश्न 2 (काव्यांश): (i) B   (ii) B   (iii) B
(iv) पंक्ति दर्शाती है कि कवि किसी बाहरी सहारे पर निर्भर नहीं, बल्कि अपने ही आंतरिक बल और तेज से अपना मार्ग स्वयं निर्मित करता है।
(v) 'दीपक' निष्क्रिय, सीमित प्रकाश का प्रतीक है, जबकि 'ज्वाला' सक्रिय, आत्म-त्याग और तीव्र संघर्षशीलता का प्रतीक है — कवि स्वयं को दूसरी श्रेणी में रखता है।
खंड – ख : व्यावहारिक व्याकरण
वाक्य भेद: (i) मिश्र वाक्य   (ii) संयुक्त वाक्य   (iii) क्योंकि वह परिश्रमी था और अनुशासन में रहता था, इसलिए वह हर क्षेत्र में सफल हुआ   (iv) सूर्य अस्त होने तक किसान खेत में काम करते रहे, और अंधेरा छाते ही वे घर लौट आए   (v) B
वाच्य: (i) B   (ii) अनुभवी शिक्षक ने जटिल विषय को सरलता से समझाया   (iii) भाववाच्य — कर्ता के अतिरिक्त क्रिया की असमर्थता/अनिच्छा को इंगित करता है, कर्मवाच्य में कर्म प्रधान होता है जबकि भाववाच्य में क्रिया का भाव प्रधान होता है   (iv) किसानों ने वर्षों के अथक परिश्रम से बंजर भूमि को उपजाऊ बनाया   (v) भाववाच्य; यह कर्मवाच्य से भिन्न है क्योंकि यहाँ कर्ता ही अकर्मक क्रिया की असमर्थता व्यक्त कर रहा है, किसी कर्म पर बल नहीं है
पद परिचय (नमूना उत्तर): (i) निरंतर — रीतिवाचक क्रिया-विशेषण, 'परिश्रम करते हैं' क्रिया का विशेषण। (ii) ने — कर्ता कारक की विभक्ति, 'अध्यापक' के साथ प्रयुक्त, भूतकालिक सकर्मक क्रिया के साथ अनिवार्य। (iii) जिस — संबंधवाचक सर्वनाम, आश्रित उपवाक्य को प्रधान उपवाक्य से जोड़ता है, पुल्लिंग, एकवचन। (iv) घुमड़ रहे थे — अकर्मक क्रिया, भूतकालिक तात्कालिक (अपूर्ण) क्रिया, बहुवचन। (v) कैसे — रीतिवाचक प्रश्नवाचक क्रिया-विशेषण, विस्मयादिबोधक भाव के साथ 'कर दिखाया' क्रिया का विशेषण।
अलंकार: (i) उत्प्रेक्षा — 'मानो' शब्द से संभावना व्यक्त होती है, जबकि उपमा में सीधे तुलना होती है (जैसे/सा)   (ii) रूपक — यहाँ उपमेय (वाणी) पर उपमान (अमृत) का सीधा आरोप है, तुलनावाचक शब्द अनुपस्थित है, इसलिए यह उपमा नहीं   (iii) अतिशयोक्ति — लोकसीमा से बढ़ाकर वर्णन किया गया है   (iv) मानवीकरण — निर्जीव वस्तुओं (पेड़, हवा) में मानवीय क्रियाएँ (फुसफुसाना, मुस्कुराना) आरोपित की गई हैं   (v) उपमा — उपमेय: धैर्य/हृदय; उपमान: पर्वत/नदी; वाचक शब्द: समान
खंड – ग : पाठ्यपुस्तक एवं पूरक पाठ्यपुस्तक
क्षितिज गद्य खंड: (i) B   (ii) B   (iii) B   (iv) B   (v) B
(vi) नवाब साहब का व्यवहार दिखाता है कि सामंती वर्ग वास्तविकता से कटकर आडंबर, झूठी शान और दिखावटी शिष्टाचार में जीना पसंद करता था।
(vii) शीर्षक 'लखनवी अंदाज़' नवाबी तहज़ीब की उस बनावटी शान का व्यंग्यपूर्ण चित्रण है, जो वास्तविकता से दूर केवल दिखावे पर टिकी थी।
(viii) लेखक व्यावहारिक व सहज दृष्टिकोण रखता था, जबकि नवाब साहब का दृष्टिकोण बनावटी शिष्टाचार से प्रभावित था — यह भिन्नता वर्ग-चेतना को दर्शाती है।
(ix) लेखक व्यंग्यात्मक रूप से यह दर्शाता है कि आडंबर और झूठी शान वास्तविक आवश्यकताओं व मानवीय सहजता से व्यक्ति को दूर कर देते हैं।
क्षितिज काव्य खंड: (i) B   (ii) B   (iii) B   (iv) B   (v) B
(vi) पंक्ति दर्शाती है कि जीवन में सफलता और उद्देश्य-प्राप्ति सामूहिक सहयोग व एकता से ही संभव है, अकेले प्रयास पर्याप्त नहीं।
(vii) कवि स्पष्ट करता है कि केवल जैविक रूप से 'मनुष्य' होना पर्याप्त नहीं; 'मनुष्यता' परोपकार और त्याग से अर्जित करनी पड़ती है।
(viii) परमार्थ का मार्ग अधिक श्रेष्ठ बताया गया है, क्योंकि यह व्यक्ति को संकीर्ण स्वार्थ से ऊपर उठाकर सच्ची मानवता की ओर ले जाता है।
(ix) वर्तमान समाज में बढ़ते व्यक्तिवाद और आत्मकेंद्रित प्रवृत्तियों के बीच यह कविता सामूहिकता और परस्पर सहयोग की महत्ता को पुनः स्थापित करती है।
कृतिका भाग-2 (नमूना बिंदु): (i) दोनों संस्थाएँ (परिवार व मठ) भिन्न स्वरूप की होते हुए भी संपत्ति और अधिकार के प्रति समान स्वार्थ-प्रवृत्ति दर्शाती हैं, जो पाठ का मूल व्यंग्य है। (ii) बालक की दृष्टि से कथन कथा को अधिक निर्दोष व मार्मिक बनाता है, जिससे वयस्कों की जटिलताएँ अधिक स्पष्टता से उजागर होती हैं। (iii) यात्रा-वृत्तांत विधा लेखिका को प्राकृतिक दृश्यों के साथ-साथ स्थानीय लोगों के जीवन, संस्कृति और भावनाओं को भी सहज रूप से पिरोने की स्वतंत्रता देती है।
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विस्तृत मूल्यांकन योजना / MARKING SCHEME
1. कठिनाई-स्तर विश्लेषण (उच्च-स्तरीय / HOTS संस्करण)
स्तरविवरणअंकप्रतिशत
सरलप्रत्यक्ष तथ्य आधारित प्रश्न1620%
मध्यमसमझ व अनुप्रयोग आधारित प्रश्न3240%
उच्च / विश्लेषणात्मक (HOTS)विश्लेषण, तुलना, कारण-स्पष्टीकरण, समकालीन प्रासंगिकता आधारित प्रश्न3240%
कुल80100%

नोट: यह संस्करण मानक कठिनाई (30% सरल : 50% मध्यम : 20% उच्च) की तुलना में HOTS-आधारित प्रश्नों को अधिक महत्व देता है ताकि विद्यार्थी विश्लेषणात्मक व तर्कसंगत लेखन का सशक्त अभ्यास कर सकें।

2. खंड – क एवं ख (सामान्य दिशा-निर्देश)
• MCQ: केवल सही विकल्प चुनने पर पूर्ण अंक; आंशिक अंक नहीं।
• अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न (2 अंक): 1 अंक कारण/विश्लेषण की सत्यता के लिए, 1 अंक स्पष्टता, तर्कसंगति व भाषा-शुद्धता के लिए।
• व्याकरण के विश्लेषणात्मक प्रश्नों में उचित तर्क सहित वैकल्पिक सही उत्तर को भी पूर्ण अंक दिए जाएँ।
3. खंड – ग (पाठ्यपुस्तक आधारित प्रश्न)
• MCQ: 1 अंक प्रति सही उत्तर।
• 2 अंकों के प्रश्न: 1 अंक विषयवस्तु/विश्लेषण के लिए, 1 अंक तर्कसंगत स्पष्टीकरण के लिए।
• कृतिका के 4 अंकों वाले विश्लेषणात्मक प्रश्न: 2 अंक विषयवस्तु व तुलनात्मक विश्लेषण के लिए, 1 अंक क्रमबद्धता/प्रस्तुतीकरण के लिए, 1 अंक भाषा-शुद्धता के लिए।
4. खंड – घ (रचनात्मक लेखन) — विस्तृत अंक-विभाजन
घटकविवरणअंक
अनुच्छेद लेखन (6 अंक)विषयवस्तु — तर्कसंगत विश्लेषण एवं संतुलित दृष्टिकोण3
क्रमबद्धता / प्रस्तुतीकरण1
भाषा-शुद्धता (वर्तनी, व्याकरण)1
मौलिकता एवं शब्द-सीमा का पालन1
पत्र लेखन (5 अंक)प्रारूप (पता, दिनांक, संबोधन, समापन)1
विषयवस्तु — तर्कसंगत एवं संवेदनशील विवरण2
भाषा-शुद्धता1
प्रस्तुतीकरण एवं शब्द-सीमा का पालन1
स्ववृत्त / ई-मेल (5 अंक)प्रारूप की शुद्धता1
विषयवस्तु — प्रासंगिक जानकारी की स्पष्टता2
भाषा-शुद्धता1
प्रस्तुतीकरण1
विज्ञापन / संदेश (4 अंक)प्रारूप एवं आवश्यक जानकारी2
विषयवस्तु/आकर्षण1
भाषा-शुद्धता एवं प्रस्तुतीकरण1
5. अंतिम जाँच सूची (Verification)
बिंदुस्थिति
कुल अंक = 80
समय = 3 घंटे
खंड क = 14 अंक
खंड ख = 16 अंक (20 प्रश्नों में से 16)
खंड ग = 30 अंक (गद्य 11 + काव्य 11 + कृतिका 8)
खंड घ = 20 अंक (6+5+5+4)
HOTS भारांश अपेक्षाकृत अधिक (40%)
सभी आंतरिक विकल्प एवं शब्द-सीमा स्पष्ट
उत्तरमाला व Marking Scheme उपलब्ध
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