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Friday, October 10, 2025

भारतीय संविधान संशोधन अधिनियम

भारतीय संविधान संशोधन अधिनियम

भारतीय संविधान के संशोधन अधिनियम

संशोधन संख्या वर्ष मुख्य उद्देश्य/परिवर्तन
1वां 1951 इस संशोधन ने अनुच्छेद 15, 19, 31, और 31A को जोड़ा या संशोधित किया। इसका मुख्य उद्देश्य भूमि सुधार कानूनों को लागू करना, जमींदारी प्रथा को समाप्त करना, और बोलने की स्वतंत्रता पर कुछ प्रतिबंध लगाना था। साथ ही, अनुसूचित जातियों और जनजातियों के लिए आरक्षण को मजबूत किया गया।
2वां 1952 लोकसभा और विधानसभाओं में प्रतिनिधित्व की सीमा को बढ़ाने के लिए। यह जनसंख्या के आधार पर सीटों के पुनर्निर्धारण के लिए था, ताकि राज्यों में उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके।
3रा 1954 वित्तीय आपातकाल के प्रावधान को जोड़ा गया (अनुच्छेद 360), जिससे केंद्र सरकार को आर्थिक संकट में राज्यों पर नियंत्रण करने की शक्ति मिली।
4था 1955 नौवीं अनुसूची में भूमि सुधार से संबंधित कानूनों को शामिल किया गया ताकि वे न्यायिक समीक्षा से बच सकें। यह जमींदारी उन्मूलन को लागू करने के लिए था।
5वां 1955 राष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया में संशोधन किया गया, जिससे उनकी नियुक्ति और कार्यकाल से संबंधित नियम स्पष्ट हुए।
6ठा 1956 राज्य पुनर्गठन अधिनियम के तहत राज्यों की सीमाओं को पुनर्गठित किया गया। यह भाषाई आधार पर राज्यों के गठन को सक्षम करने के लिए था।
7वां 1956 राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों की पुनर्संरचना की गई। पहली अनुसूची में संशोधन कर नए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को शामिल किया गया।
8वां 1960 बेरुबारी यूनियन और कुछ अन्य क्षेत्रों को भारत-पाकिस्तान समझौते के तहत हस्तांतरित करने के लिए प्रावधान किया गया।
9वां 1960 भारत-पाकिस्तान सीमा समझौते के तहत कुछ क्षेत्रों की सीमाओं में समायोजन किया गया।
10वां 1961 पॉन्डिचेरी को भारत के संघ राज्य क्षेत्र के रूप में शामिल किया गया।
11वां 1961 नागरिकता अधिनियम में संशोधन कर विदेशी मूल के व्यक्तियों के लिए नागरिकता नियमों को स्पष्ट किया गया।
12वां 1962 गोवा, दमन और दीव को भारत में शामिल करने और उनकी सीमाओं को परिभाषित करने के लिए।
13वां 1962 नागालैंड को विशेष राज्य का दर्जा दिया गया और भाषा संबंधी प्रावधान जोड़े गए।
14वां 1963 पॉन्डिचेरी, कराईकल, माहे और यानम को विधायी शक्तियों के साथ संघ राज्य क्षेत्र बनाया गया।
15वां 1963 उच्च न्यायालयों के क्षेत्राधिकार और जजों की सेवानिवृत्ति आयु में संशोधन किया गया।
16वां 1963 राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने के लिए बोलने की स्वतंत्रता पर और प्रतिबंध लगाए गए।
17वां 1964 नौवीं अनुसूची में और अधिक भूमि सुधार कानून जोड़े गए ताकि वे न्यायिक समीक्षा से सुरक्षित रहें।
18वां 1966 पंजाब और हरियाणा के पुनर्गठन के लिए, जिसमें हरियाणा को अलग राज्य बनाया गया।
19वां 1966 राष्ट्रपति को राज्यपालों की नियुक्ति और उनके कार्यकाल में अधिक शक्तियां प्रदान की गईं।
20वां 1966 उत्तर प्रदेश और बिहार की सीमाओं में समायोजन किया गया।
21वां 1967 आठवीं अनुसूची में सिंधी भाषा को शामिल किया गया।
22वां 1969 राष्ट्रपति चुनाव प्रक्रिया में संशोधन कर मतदान प्रणाली को और स्पष्ट किया गया।
23रा 1969 संपत्ति के अधिकार को मौलिक अधिकारों से हटाकर सामान्य कानूनी अधिकार बनाया गया।
24था 1971 राष्ट्रपति को आपातकाल घोषित करने की शक्ति दी गई और संसद को संविधान संशोधन की व्यापक शक्ति प्रदान की गई।
25वां 1971 संपत्ति के अधिकार को मौलिक अधिकार से हटाकर कानूनी अधिकार बनाया गया और मुआवजे के नियमों में बदलाव किया गया।
26वां 1971 नौवीं अनुसूची में और कानून जोड़े गए ताकि वे न्यायिक समीक्षा से बच सकें।
27वां 1971 आठवीं अनुसूची में कोंकणी, मणिपुरी और नेपाली भाषाओं को शामिल किया गया।
28वां 1972 लोकसभा और विधानसभाओं में अनुसूचित जातियों और जनजातियों के लिए आरक्षण बढ़ाया गया।
29वां 1972 नागरिकता अधिनियम में संशोधन कर प्रवासी भारतीयों के लिए नियम स्पष्ट किए गए।
30वां 1972 उच्च न्यायालयों के क्षेत्राधिकार में बदलाव कर उनके कार्यक्षेत्र को बढ़ाया गया।
31वां 1973 पंजाब विधानसभा में सीटों की संख्या बढ़ाई गई।
32वां 1973 पंजाब में निर्वाचन क्षेत्रों का सीमांकन किया गया।
33रा 1974 गुजरात और नागालैंड में विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ाई गई।
34था 1974 नौवीं अनुसूची में और अधिक भूमि सुधार कानून जोड़े गए।
35वां 1974 जम्मू-कश्मीर के लिए विशेष प्रावधानों में संशोधन किया गया।
36वां 1975 सिक्किम को भारत के सहयोगी राज्य के रूप में शामिल किया गया।
37वां 1975 गुजरात में निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्सीमांकन किया गया।
38वां 1975 आठवीं अनुसूची में और भाषाएं जोड़ी गईं।
39वां 1975 आपातकाल के दौरान कुछ मौलिक अधिकारों को निलंबित करने और न्यायिक समीक्षा को सीमित करने के लिए।
40वां 1976 नागालैंड में विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ाई गई।
41वां 1976 तमिलनाडु में अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षण बढ़ाया गया।
42वां 1976 इसे 'मिनी संविधान' कहा जाता है। इसमें प्रस्तावना में 'समाजवादी' और 'धर्मनिरपेक्ष' शब्द जोड़े गए, मौलिक कर्तव्यों को शामिल किया गया, और संसद की शक्तियों को बढ़ाया गया।
43रा 1977 गुजरात में विधानसभा सीटों में बदलाव किया गया।
44था 1978 आपातकाल से संबंधित प्रावधानों को हटाया गया और मौलिक अधिकारों को बहाल किया गया।
45वां 1980 असम समझौते को लागू करने के लिए नागरिकता नियमों में संशोधन।
46ठा 1982 नौवीं अनुसूची में और कानून जोड़े गए।
47वां 1984 सिख समुदाय के लिए धार्मिक स्थलों से संबंधित प्रावधान जोड़े गए।
48वां 1984 पंजाब में विधानसभा सीटों में बदलाव।
49वां 1984 त्रिपुरा में जनजातीय क्षेत्रों के लिए विशेष प्रावधान।
50वां 1984 नौवीं अनुसूची में और कानून जोड़े गए।
51वां 1984 नागरिकता नियमों में और संशोधन किए गए।
52वां 1985 संपत्ति के अधिकार को पूरी तरह से मौलिक अधिकारों से हटाया गया।
53रा 1986 राष्ट्रीय आपातकाल के प्रावधानों को और स्पष्ट किया गया।
54था 1986 नौवीं अनुसूची में और कानून जोड़े गए।
55वां 1987 मिजोरम को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया गया।
56ठा 1987 अरुणाचल प्रदेश को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया गया।
57वां 1987 राष्ट्रपति चुनाव प्रक्रिया में और संशोधन।
58वां 1987 सिक्किम में विधानसभा सीटों में बदलाव।
59वां 1988 गुजरात में अनुसूचित जातियों/जनजातियों के लिए आरक्षण।
60वां 1988 पंचायत चुनावों के लिए प्रावधान जोड़े गए।
61वां 1989 मतदान की आयु 21 से घटाकर 18 वर्ष की गई।
62वां 1989 संपत्ति कर से संबंधित प्रावधानों में संशोधन।
63रा 1989 अनुसूचित जातियों और जनजातियों के लिए आरक्षण को बढ़ाया गया।
64था 1990 नौवीं अनुसूची में और कानून जोड़े गए।
65वां 1990 गुजरात में जनजातीय क्षेत्रों के लिए प्रावधान।
66ठा 1990 मणिपुर में जनजातीय क्षेत्रों के लिए प्रावधान।
67वां 1990 दिल्ली को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र का दर्जा दिया गया।
68वां 1991 नौवीं अनुसूची में और कानून जोड़े गए।
69वां 1991 गोवा को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया गया।
70वां 1991 नागालैंड में विधानसभा सीटों में बदलाव।
71वां 1992 आठवीं अनुसूची में कोंकणी, मणिपुरी और नेपाली को शामिल किया गया।
72वां 1992 तमिलनाडु में पंचायती राज संस्थाओं के लिए प्रावधान।
73रा 1992 पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा दिया गया और ग्रामीण शासन को मजबूत किया गया।
74था 1992 नगरपालिका और शहरी स्थानीय निकायों को संवैधानिक दर्जा दिया गया।
75वां 1994 पंचायत चुनावों के लिए और प्रावधान जोड़े गए।
76ठा 1994 नौवीं अनुसूची में और कानून जोड़े गए।
77वां 1995 उच्च न्यायालयों में जजों की नियुक्ति प्रक्रिया में संशोधन।
78वां 1995 पंचायतों में अनुसूचित जातियों और जनजातियों के लिए आरक्षण।
79वां 1995 लोकसभा और विधानसभाओं में सीटों का पुनर्निर्धारण।
80वां 2000 पंचायतों के लिए वित्तीय प्रावधानों में संशोधन।
81वां 2000 अनुसूचित जातियों और जनजातियों के लिए आरक्षण को बढ़ाया गया।
82वां 2000 नौवीं अनुसूची में और कानून जोड़े गए।
83रा 2000 गुजरात में विधानसभा सीटों में बदलाव।
84था 2002 पंचायतों और नगरपालिकाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण सुनिश्चित किया गया।
85वां 2001 आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम (ESMA) से संबंधित प्रावधान।
86ठा 2002 6-14 वर्ष के बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा को मौलिक अधिकार बनाया गया (अनुच्छेद 21A)।
87वां 2003 उच्च न्यायालयों के क्षेत्राधिकार में और संशोधन।
88वां 2003 सर्वोच्च न्यायालय में शुल्क से संबंधित प्रावधान।
89वां 2003 अनुसूचित जातियों और जनजातियों के लिए आरक्षण को और बढ़ाया गया।
90वां 2003 नौवीं अनुसूची में और कानून जोड़े गए।
91वां 2003 मतदाता सूची के पुनर्निर्धारण के लिए प्रावधान।
92वां 2003 राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC) की स्थापना का प्रस्ताव।
93रा 2005 अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए शैक्षिक संस्थानों में आरक्षण।
94था 2006 सहकारी समितियों को संवैधानिक दर्जा दिया गया।
95वां 2009 अनुसूचित जातियों और जनजातियों के लिए प्रमोशन में आरक्षण।
96ठा 2011 सर्वोच्च न्यायालय के कार्यों से संबंधित प्रावधान।
97वां 2011 सहकारी समितियों के लिए और प्रावधान जोड़े गए।
98वां 2012 वित्त आयोग के कार्यों में संशोधन।
99वां 2014 राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC) की स्थापना, जो बाद में असंवैधानिक घोषित हुआ।
100वां 2015 भारत और बांग्लादेश के बीच भूमि सीमा समझौते को लागू किया गया।
101वां 2016 वस्तु और सेवा कर (GST) को लागू करने के लिए संवैधानिक आधार प्रदान किया गया।
102वां 2018 राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा दिया गया।
103रा 2019 आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (EWS) के लिए 10% आरक्षण लागू किया गया।
104था 2019 अनुसूचित जातियों और जनजातियों के लिए उप-वर्गीकरण को सक्षम किया गया।
105वां 2021 राज्यों को अपनी OBC सूची बनाने का अधिकार दिया गया।
106वां 2023 लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण लागू किया गया, जो 2029 से प्रभावी होगा।