वन विहार राष्ट्रीय उद्यान भोपाल ,
भोपाल मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में स्थित एक अत्यंत महत्वपूर्ण राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव संरक्षण क्षेत्र, प्राकृतिक जैव विविधता केंद्र, ईको-टूरिज्म स्थल, पर्यावरणीय अध्ययन क्षेत्र तथा आधुनिक चिड़ियाघर अवधारणा (Modern Zoo Concept) का उत्कृष्ट उदाहरण है, जो ऐतिहासिक ऊपरी झील (बड़ा तालाब / भोजताल) के दक्षिणी तट पर फैला हुआ है और लगभग 4.45 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में विस्तृत है। इस उद्यान को वर्ष 1979 में राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा प्रदान किया गया, जबकि इसे केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (Central Zoo Authority) से मान्यता प्राप्त है, जिससे यह भारत के चुनिंदा ऐसे उद्यानों में सम्मिलित हो गया है जहाँ कैद और प्राकृतिक आवास का संतुलित समन्वय देखने को मिलता है। वन विहार की स्थापना का मूल उद्देश्य वन्यजीव संरक्षण, लुप्तप्राय प्रजातियों का संरक्षण, प्राकृतिक आवास का पुनर्निर्माण, पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना, जैव विविधता का संरक्षण, तथा मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व की भावना को सुदृढ़ करना रहा है। यह उद्यान सामान्य चिड़ियाघरों से इस अर्थ में भिन्न है कि यहाँ जानवरों को पिंजरों में बंद करने के बजाय खुली और प्राकृतिक बाड़ों (Open Enclosures) में रखा जाता है, जहाँ उनके रहने, चलने, शिकार करने और व्यवहार करने की प्राकृतिक स्वतंत्रता बनी रहती है, जिससे यह स्थान प्राकृतिक वन्यजीव अभयारण्य जैसा अनुभव कराता है। वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में बाघ, शेर, तेंदुआ, भालू, लकड़बग्घा, सियार, लोमड़ी, जैसे प्रमुख मांसाहारी वन्यजीव, तथा चीतल, सांभर, नीलगाय, काला हिरण, चौसिंगा, जैसे शाकाहारी वन्यजीव पाए जाते हैं, जो मध्यभारत की प्राकृतिक वन संपदा का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। इसके अतिरिक्त यहाँ मगरमच्छ, घड़ियाल, कछुए, तथा विभिन्न सरीसृप प्रजातियाँ (Reptiles) भी संरक्षित हैं, जो उद्यान के जलीय और दलदली पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित बनाए रखते हैं। वन विहार राष्ट्रीय उद्यान पक्षी प्रेमियों (Bird Watchers) के लिए भी अत्यंत आकर्षक स्थल है, क्योंकि यहाँ स्थानीय तथा प्रवासी पक्षियों की सैकड़ों प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जिनमें सारस, बगुला, जलकौआ, पेलिकन, किंगफिशर, बतख, चील, बाज, आदि प्रमुख हैं, और सर्दियों के मौसम में यह क्षेत्र प्रवासी पक्षियों का आश्रय स्थल बन जाता है, जिससे यह पक्षी संरक्षण और पक्षी अध्ययन का प्रमुख केंद्र बनता है। वन विहार की भौगोलिक स्थिति इसे विशेष बनाती है, क्योंकि एक ओर घने वन क्षेत्र, दूसरी ओर विशाल जलाशय (Upper Lake), तथा चारों ओर फैली हरित वनस्पति, घास के मैदान, झाड़ियाँ, और स्थानीय वनस्पतियाँ मिलकर एक समृद्ध इको-सिस्टम का निर्माण करती हैं। यहाँ पाई जाने वाली वनस्पतियों में सागौन, साल, बबूल, जामुन, पीपल, बरगद, तथा विभिन्न औषधीय पौधे शामिल हैं, जो इस क्षेत्र को वनस्पति विज्ञान (Botany) के अध्ययन हेतु भी महत्वपूर्ण बनाते हैं। वन विहार राष्ट्रीय उद्यान का शैक्षणिक महत्व अत्यंत व्यापक है, क्योंकि यह स्थान विद्यालयीन शैक्षणिक भ्रमण, महाविद्यालयीन अध्ययन यात्राओं, वन्यजीव अनुसंधान, पर्यावरण शिक्षा, तथा जैव विविधता जागरूकता कार्यक्रमों के लिए नियमित रूप से उपयोग में लाया जाता है, जिससे विद्यार्थियों में प्रकृति प्रेम, पर्यावरण संरक्षण की भावना, और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास होता है। उद्यान में प्रकृति पथ (Nature Trails), साइकिल ट्रैक, पैदल भ्रमण मार्ग, तथा सूचना पट्टिकाएँ विकसित की गई हैं, जो आगंतुकों को वन्यजीवों और वनस्पतियों के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान करती हैं। वन विहार राष्ट्रीय उद्यान पर्यटन की दृष्टि से भोपाल का एक प्रमुख आकर्षण है और इसे देखने प्रतिवर्ष हजारों देशी-विदेशी पर्यटक आते हैं, जिससे यह स्थान मध्यप्रदेश पर्यटन को विशेष पहचान दिलाता है। यह उद्यान न केवल मनोरंजन का साधन है, बल्कि जिम्मेदार पर्यटन (Responsible Tourism) और सतत विकास (Sustainable Development) की अवधारणा को भी बढ़ावा देता है। वन विहार में प्रवेश व्यवस्था, सुरक्षा प्रणाली, पशु चिकित्सकीय सेवाएँ, और प्रबंधन प्रणाली अत्यंत सुव्यवस्थित हैं, जिससे यहाँ रहने वाले वन्यजीवों का स्वास्थ्य और सुरक्षा सुनिश्चित होती है। यह उद्यान वन विभाग, मध्यप्रदेश शासन द्वारा संचालित है और यहाँ समय-समय पर वन्यजीव संरक्षण अभियान, जागरूकता शिविर, विश्व पर्यावरण दिवस, वन्यजीव सप्ताह, तथा पक्षी गणना कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जो समाज को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वन विहार राष्ट्रीय उद्यान भोपाल की पहचान को “झीलों की नगरी” के साथ-साथ “हरित नगरी” के रूप में भी स्थापित करता है और यह सिद्ध करता है कि शहरी विकास और प्रकृति संरक्षण साथ-साथ संभव है। इस प्रकार वन विहार राष्ट्रीय उद्यान न केवल एक पर्यटन स्थल है, बल्कि यह प्राकृतिक धरोहर, पर्यावरणीय संतुलन का प्रहरी, वन्यजीवों का सुरक्षित आश्रय, तथा भावी पीढ़ियों के लिए प्रकृति का जीवंत पाठशाला है, जो भोपाल, मध्यप्रदेश और सम्पूर्ण भारत के लिए गर्व का विषय है।
| क्रम | विषय | विवरण |
|---|---|---|
| 1 | नाम | वन विहार राष्ट्रीय उद्यान |
| 2 | स्थान | भोपाल, मध्यप्रदेश (ऊपरी झील / बड़ा तालाब के किनारे) |
| 3 | स्थापना वर्ष | 1979 |
| 4 | क्षेत्रफल | लगभग 4.45 वर्ग किलोमीटर |
| 5 | प्रकार | राष्ट्रीय उद्यान, आधुनिक चिड़ियाघर (Modern Zoo Concept) |
| 6 | संचालन | वन विभाग, मध्यप्रदेश शासन |
| 7 | मान्यता | केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (Central Zoo Authority) |
| 8 | प्रमुख उद्देश्य | वन्यजीव संरक्षण, जैव विविधता संरक्षण, पर्यावरण संतुलन |
| 9 | विशेषता | खुले प्राकृतिक बाड़े, बिना पिंजरे की अवधारणा |
| 10 | प्रमुख मांसाहारी | बाघ, शेर, तेंदुआ, भालू, लकड़बग्घा |
| 11 | प्रमुख शाकाहारी | चीतल, सांभर, नीलगाय, काला हिरण |
| 12 | सरीसृप | मगरमच्छ, घड़ियाल, कछुए |
| 13 | पक्षी प्रजातियाँ | सारस, बगुला, बतख, पेलिकन, किंगफिशर |
| 14 | प्रवासी पक्षी | शीत ऋतु में साइबेरियन व अन्य प्रवासी पक्षी |
| 15 | वनस्पति | सागौन, साल, पीपल, बरगद, जामुन |
| 16 | पारिस्थितिकी तंत्र | वन, घासभूमि, झील, दलदली क्षेत्र |
| 17 | शैक्षणिक महत्व | शैक्षणिक भ्रमण, पर्यावरण शिक्षा, शोध |
| 18 | पर्यटन महत्व | ईको-टूरिज्म, प्राकृतिक पर्यटन स्थल |
| 19 | भ्रमण सुविधाएँ | साइकिल ट्रैक, पैदल पथ, नेचर ट्रेल |
| 20 | सुरक्षा व्यवस्था | पशु चिकित्सालय, निगरानी, संरक्षण नियम |
| 21 | प्रमुख कार्यक्रम | वन्यजीव सप्ताह, पर्यावरण दिवस, पक्षी गणना |
| 22 | सामाजिक भूमिका | पर्यावरण जागरूकता, प्रकृति संरक्षण |
| 23 | भोपाल की पहचान | झीलों की नगरी एवं हरित नगरी |
| 24 | संरक्षण भूमिका | लुप्तप्राय प्रजातियों का संरक्षण |
| 25 | महत्व | प्राकृतिक धरोहर एवं जीवंत पर्यावरण पाठशाला |